Sunday, February 15, 2009

उसके लिए...

मुझे तुमसे कितना कुछ मिला ।
रातें लंबी- लंबी,
काली अंधेरी।
लगातार बारिश,
भीगती सुबह।
तपती दुपहरी,
लू के थपेड़े।
फिर ओस भरी,
सर्द शाम।
तुम बिन भी,
बहुत कुछ है
मेरे पास।
धूल, आंधी है
प्यास, बैचेनी है।
प्यार अधूरा सा,
पूरा बचा है।
अब भी, तुम बिन ।।

9 comments:

रचना गौड़ ’भारती’ said...

भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
लिखते रहि‌ए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
मेरे द्वारा संपादित पत्रिका देखें
www.zindagilive08.blogspot.com
आर्ट के लि‌ए देखें
www.chitrasansar.blogspot.com

संगीता पुरी said...

बहुत सुंदर…..आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

amar barwal 'Pathik' said...

sunder kavita or naynabhiraam tasveeron ke lea dhanyavaad. chithhajagat apka haardik abhinandan karta hai...

Jyotsna Pandey said...

ब्लॉग की दुनिया में आपका हार्दिक स्वागत है .आपके अनवरत लेखन के लिए मेरी शुभ कामनाएं ...

Abhishek said...

Acchi post. swagat.

sabkiawaz said...

बहुत अच्छी शुरुआत है। लिखते रहिए।
-हिमांशु

प्रकाश बादल said...

वाह जीतेंद्र भाई मज़ा आ गया आपकी रचना के साथ-साथ नैनीता की सैर भी कर ली।

नारदमुनि said...

kaash1 man himalay saaa hota. narayan narayan

प्रशांत मलिक said...

तुम बिन भी,
बहुत कुछ है
मेरे पास।
धूल, आंधी है
प्यास, बैचेनी है।..

bahut badhiya...