हिमाल : अपना-पहाड़

बस एक कामना, हिम जैसा हो जाए मन

Monday, March 9, 2009

होली है.....

(दोस्तों कल होली है। कुमाऊंनी होली की मैंने बात तो छेड़ी.... पर उसे आगे नहीं बढ़ा सका।.... अब जब एक दिन बाद होली है, तो सोचता हूं..... क्यों ना आपको कुमाऊंनी होली के कुछ रंग दिखा दूं। ..... आप सभी की होली रंगों से सराबोर रहे.... ऐसी कामना है।)

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एक - होली खेलत हैं कैलाश धनी
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होली खेलत हैं कैलाश धनी, होली खेलत हैं कैलाश धनी,
होली खेलत हैं कैलाश धनी,
होली खेलत हैं कैलाश धनी, होली खेलत हैं कैलाश धनी।
औरों को देवें मलियागिरी चंदन

आपौं बभूति रमाई धनी, होली खेलत हैं कैलाश धनी।
औरों को दे हैं षटरष व्यंजन
आपौं धतूरी रमाय धनी, होली खेलत हैं कैलाश धनी।
औरों को दे हैं रत्न आभूषण
आपौं बागम्बर ओढें धनी, होली खेलत हैं कैलाश धनी।
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दो - उठ ओ पछवा मेघ
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उठ हो पछवा मेघ, देवर संग रंग भीजे है चुनरी
अच्छा हो देवर ओढ़ना जो भीजे भीजन दे,
स्योनिन दे हो बचाय। देवर ओढना जो
अच्छा हां रे देवर बिढिया जो भीजै भीजन दे,
कपलिया दे हो बचाय । देवर
अच्छा हां रे देवर सुरमा जो भीजै भीजन दे,
अंखियां दे दो बचाय । बालम
अच्छा हो देवर हैसिया जो भीजै बीजन दे,
गलड़ा दे दो बचाय । बालम
अच्छा हो देवर अंगिया जो भीजै भीजन दे,
छतिया दे दो बचाय । बालम
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तीन- तब जानूं हो
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तब जानूं हो खिलाड़ी,
जो हम संग खेलो बिहारी
हमको अकेली समझो ना
मोहन
हम वृषभान दुलारी
कुमारी
ले लुंगी तोरी लकुटि
मुरलिया
और छीन लुंगी पिचकारी
जो हम संग
तब जानूं.....
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1 Comments:

At March 9, 2009 at 9:40 AM , Blogger Udan Tashtari said...

लग गया...होली है!!!

होली की बहुत बधाई एवं शुभकामनाऐं.

 

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