Wednesday, February 25, 2009

ये है ख़बरों का बाज़ार।

टीवी न्यूज़ का कारोबार अपने देश में अभी नया है। ऐसा टीवी न्यूज़ को संचालित करने वाले लोग कहते हैं। इसकी आड़ में पिछले 6-7 सालों से चौबीस घंटे के न्यूज़ चैनलों ने क्या-क्या नहीं दिखाया ?.... पहले थ्री सी यानि क्रिकेट, क्राइम और सिनेमा की थ्योरी दी गयी। फिर चमत्कार की ख़बरों का एक लंबा दौर चला। जल्दी ही चमत्कार की ख़बरों को जानवरों की स्टोरी ने टेक ओवर कर लिया। टावर पर किसी के भी चढ़ जाने की घटनाएं समाचार के रुप में पेश की गयी।..... और ये सब चलाने का फैसला लेने वालों ने इसके कुछ कारण भी गिनाए। मिया बीबी की लड़ाई का खेल भी टीवी पर खूब दिखाया गया। एमएमएस क्लिप से लेकर सेक्स को दिखाने की जो भी इवेंट हो सकते थे, उपयोग में लाए गए।...नाच गाना, आइटम सॉन्ग, हंसगुल्लों की फुलझड़ी।...... इंटरटेनमेंट को न्यूज़ बना दिया गया। लोगों को बताया गया... कि ये ख़बर है।.... देखना है तो देखो नहीं तो भाड़ में जाओ।...... दौर कुछ बदला है.... कुछ समाचार चैनलों ने अपनी लक्ष्मण रेखा खींची है।... ख़बरों का दौर फिर से लौटा भी है। लेकिन आज भी न्यूज़ को बरबाद करने वाले अपनी मनमानी कर रहे हैं।............ ये पंक्तियां आज से करीब 2 साल पहले मैंने लिखी थी। कहीं डायरी के किसी पन्ने को पलटते हुए, ये नज़र आ गयी। पढ़ने के बाद लगा, ये तो आज भी मौंजू है, सो इन्हें यहां लाकर रख दिया है।.......... आप भी पढ़कर बताइए, आप जिस न्यूज़ चैनल को देखते हैं, वो इससे किस तरह अलग है।

ये है... ख़बरों का बाज़ार
सजी हुई हैं, यहां वहां पर
तरह-तरह की ख़बरें।

हंसती ख़बरें, रोती ख़बरें
आड़ी-तिरछी, ऊंची-नीची।
नंगी ख़बरें, अधनंगी ख़बरें
ख़बर विषैली, गजब नशीली।
कर देंगी हैरान,
ये है ख़बरों का बाज़ार।

कई व्यापारी, खड़े यहां पर, पड़े वहां पर।
कोई बैठा, पान चुग रहा
कोई सुर्ती हाथ मल रहा
कोई डिब्बे पर पीकें छोड़े।

कोई गाली, कोई धमकी
कोई गंदी बातें बोले।
अजब बाज़ार, ख़बरों का व्यापार।

मुर्गे की बांग, सज गयी मंडी
पैकेज चलाओ, बाइट कटाओ
खिड़की के अंदर शॉट दिखाओ
वीएसटी ले लो....... इस पर खेलो।
बीजी लगाओ.... पेलो जी।।

प्रोमो रंग बिरंगा हो
सनसन.... करता आए वो
खूब करो हंगामा।
पीटो ढोल, बजाओ नगाड़े
सच ना हो तो, क्या लेना जी।।

ये ख़बरों की मंडी,
थोड़ी अच्छी बाकि गंदी जी।।

रेप दिखाओ, नाच चलाओ
मिया-बीबी को भड़काओ
कोई बच्चा मिल जाए तो
खुश हो लो..... जमकर खेलो।।

गड्ढा-गड्ढा, आओ खेलें
प्रिंस गिर गया, उसे निकालें।

हत्या-चोरी सीनाजोरी
गुंडो-मुस्टंडों की तोड़ाफोड़ी
गाड़ी तोड़ो, कार जलाओ
टावर पर पप्पू.... खूब दिखाओ।।

टीवी तेरी महिमा न्यारी,
सज गयी मंडी करो तैयारी।।

2 comments:

अशोक मधुप said...

बहुत सार्थक कविता

संगीता पुरी said...

बिल्‍कुल सही चित्रण ....