हिमाल : अपना-पहाड़

बस एक कामना, हिम जैसा हो जाए मन

Friday, March 20, 2009

चलो प्रियतम, विदा

चलो प्रियतम, विदा
प्रेम रहे सदा
जीवन तो चलता रहेगा
यात्रा भी ।
रुक नहीं सकते कदम ।

अब यादों में
आना-जाना होगा
याद रखना
हंसकर मिलना
मैं भी कोशिश करुंगा
चलो प्रियतम, विदा ।

जीवन
सफर से कम तो नहीं
हम राही थे,
अब बिछड़ना भी होगा ना
कदम दो कदम चले साथ
इतना भी काफी था ।
अब.... उन निशानों पर भी तो,
धूल जमी है ।
चलो प्रियतम, विदा ।

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