Thursday, August 20, 2009

बादल पूछते हैं / मन का हाल


वहां बादल पूछते हैं / मन का हाल
हवा सहलाती है गाल
बारिश की हल्की-हल्की बूंदें
गीला कर देती हैं मन
कोहरा ढक लेता है
मन के सारे ग़म
पहाड़ों से ढलकती हुई
गाय, भैंस और बकरियां
बजाती हैं टुन-टुन, टन-टन
बच्चे दौड़ते हुए
चिल्लाते हैं हंसी की धुन
वहां.... दूर.... पहाड़ की एक ढालान पर
जहां है मेरा घर ।।








4 comments:

ज्योति सिंह said...

ati sundar prakriti ko sparsh karti hui rachana .badhai .

शोभा said...

waah bahut sundar likha hai. badhayi

पी.सी.गोदियाल said...

वहां.... दूर.... पहाड़ की एक ढालान पर

जहां है मेरा घर ।।

Sundar,
Meraa ghar bhee wahee tha !

vishal said...

बहुत ही अच्छी जगह पर घर है आपका। एक रेखाचित्र खींच दिया आपने मस्तिष्क पटल पर।