Monday, June 22, 2009

इंतज़ार

वक्त है...
चलने दो उसकी
आज नहीं
तो कल ही सही
कर लूंगा इंतज़ार
सदियों तक देखूंगा राह
बस एक बार कह दो
आओगी तुम... एक दिन
सौ साल बाद
मेरे लिए ।।

5 comments:

संगीता पुरी said...

अच्‍छी कविता है .. बधाई।

Nirmla Kapila said...

दिल को छू गयी आपकी ये अभिव्यक्ति लाजवाब शुभकामनायें

ओम आर्य said...

बिल्कुल रुहानी प्यार की राह के गीत लगती है ........वरना आज किसको किसकी इंतजार पडी है ......आत्मा तृप्त हो गयी......ऐसी ही रचनाये लिखे

Udan Tashtari said...

बढ़िया है..

vishal said...

बस एक बार कह दो
आओगी तुम... एक दिन
सौ साल बाद
मेरे लिए ।।
वाह जीतेंद्र जी, फोटो के साथ बहुत खूब बन पड़ा है।