Saturday, March 28, 2009

रास्ते नहीं बदलते

ये जो ज़िंदगी है

हर रोज़ दिखाती है

नए नए आदमी ।

रास्ते नहीं बदलते

बदलते हैं आदमी ।।

1 comment:

MANVINDER BHIMBER said...

शामियाने शामों के रोज ही सजाये थे....
कितनी उमीदों के मेहमान bulae थे ....
aa के darwaaje से lout गए हो
यूँ भी कोई aaega ....सोचा n था