Saturday, April 18, 2009

एक दिन तो होगी/सुबह मेरी

बार-बार हार कर भी
नहीं हारा इक बार
अभी बाकी है
आस जीत की ।
एक दिन तो होगी
सुबह मेरी....
रोक लूंगा
ढलते सूरज को/ दोपहर में
यही एक बात
मेरी हार नहीं होने देती है
हर बार हार कर भी
मेरी जीत होती है ।।

1 comment:

vishal said...

प्रेरणादायी है, भाव अच्छे हैं।